
श्रीगंगानगर।चैत्र नवरात्र के चार दिन बीतने के साथ ही श्रीगंगानगर के बाजारों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है। शुरुआती अनुमानों को पछाड़ते हुए बाजार में जो 30 से 50% उछाल की उम्मीद थी, वह अब धरातल पर दिखने लगी है।
शहर के गोल बाजार, ब्लॉक एरिया, स्वामी दयानंद मार्ग सहित अन्य बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं है, क्योंकि अब श्रद्धालुओं की नजरें अष्टमी और नवमी के पूजन की तैयारियों पर टिक गई हैं। नवरात्र के बीते चार दिनों में करोड़ों का कारोबार हुआ है। व्यापारी संतलाल गेदर के अनुसार चैत्र नवरात्र न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज का काम करता है। इस बार का उत्साह पिछले दो वर्षों की तुलना में अधिक है। बाजार पूरी तरह से सकारात्मक है और उम्मीद है कि रामनवमी तक रिकॉर्ड तोड़ कारोबार होगा।
नवरात्रों में उपवास के दौरान सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है जितना कि पूजा-अर्चना। श्रद्धालुओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए हमने स्थानीय आहार विशेषज्ञों से खास बातचीत की, ताकि आप व्रत के दौरान ऊर्जावान बने रहें और डिहाइड्रेशन या कमजोरी जैसी समस्याओं से बच सकें। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स : पिछले चार दिनों में शहर के विभिन्न शोरूम्स से सैकड़ों दोपहिया और चार पहिया वाहनों की डिलीवरी दी जा चुकी है।
व्यापारियों के अनुसार पहले नवरात्र पर जो बुकिंग्स थीं, वे पूरी हो चुकी हैं और अब अष्टमी के शुभ मुहूर्त के लिए नए ऑर्डर की बाढ़ आ गई है। फलों की कीमतों में उछाल : मांग बढ़ने से सेब और अंगूर के दामों में 20% तक की और बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन भक्ति के उत्साह के आगे महंगाई फीकी है। पूजा सामग्री: लाल चुनरी और माता के शृंगार की धूम : धार्मिक सामग्री बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि माता की पोशाक, नारियल, चुनरी और मिट्टी के दीयों की मांग इतनी है कि स्टॉक खत्म होने की नौबत आ जाती है। अब अगले 5 दिनों का फोकस: जैसे-जैसे नवरात्र आगे बढ़ रहे हैं, बाजार का स्वरूप बदल रहा है। अब दुकानदारों ने अपना स्टॉक कन्या पूजन की सामग्रियों की ओर मोड़ दिया है।
उपहार और बर्तन: पुरानी आबादी और ब्लॉक एरिया के बाजारों में कन्याओं को दिए जाने वाले उपहारों (जैसे टिफिन, पेंसिल बॉक्स और स्टील के बर्तनों) की डिमांड अचानक बढ़ गई है। वस्त्र बाजार: माता की नई पोशाकों के साथ-साथ कंजक (कन्याओं) के लिए रेडिमेड कपड़ों की बिक्री में तेजी है। सूखे मेवे और मिठाई: हलवा-पूरी के भोग के लिए सूजी, घी और सूखे मेवों का उठाव पिछले दो दिनों में दोगुना हो गया है।
1. खुद को रखें हाइड्रेटेड : .मार्च में गर्मी को देखते हुए शरीर में पानी की कमी न होने दें। .दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। .नारियल पानी, नींबू पानी, ताजी छाछ और लस्सी को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है।
2. ऊर्जा के लिए जटिल कार्बोहाइड्रेट, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा ऊर्जा के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इन्हें बनाने के तरीके पर ध्यान दें: .तली-भुनी चीजों से बचें: पूड़ी या पकौड़ी के बजाय कुट्टू की रोटी या सिंघाड़े का चीला (कम तेल/घी में) बेहतर विकल्प है। साबूदाना: साबूदाना खिचड़ी में खूब सारी सब्जियां और मूंगफली डालकर बनाएं ताकि यह पौष्टिक हो सके।
3. फलों और मेवों का साथ: मौसमी फल: तरबूज, खरबूजा, पपीता और सेब का सेवन करें। ये विटामिन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ड्राई फ्रूट्स: मुट्ठी भर बादाम, अखरोट और मखाने (रोस्टेड) भूख को शांत रखने और तुरंत एनर्जी देने में मददगार होते हैं। व्रत के दौरान कैसा हो आपका डाइट चार्ट : आहार विशेषज्ञ डॉ. दिव्या बावा के अनुसार, व्रत का मतलब केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि सात्विक और संतुलित आहार लेना है
