
इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (प्) ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक से ट्रांसजेंडर महिलाएं को अब महिला कैटेगरी के इवेंट्स में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नई नीति के मुताबिक अब सिर्फ बायोलॉजिकल फीमेल्स’ (वे महिलाएं जो जन्म से ही महिला हैं) को ही महिला कैटेगरी में खेलने की अनुमति होगी। इसके लिए एक बार जीन टेस्ट(SRY जीन स्क्रीनिंग) कराना जरूरी होगा, जिससे लिंग की पुष्टि की जाएगी। यह टेस्ट थूक, गाल का स्वाब या ब्लड सैंपल से किया जा सकता है।
वहीं, जो एथलीट जन्म के समय महिला थे लेकिन अब खुद को ट्रांसजेंडर पुरुष (Trans Men) मानते हैं, वे महिला स्पर्धाओं में खेलना जारी रख सकते हैं।
2021 में न्यूजीलैंड की वेटलिफ्टर लॉरेल हबर्ड ओलिंपिक में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला बनी थीं।
क्या था अब तक नियम अब तक IOC ट्रांसजेंडर महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन लेवल कम रखने की शर्त पर खेलने की अनुमति देती थी, या फैसला व्यक्तिगत खेल संघों पर छोड़ दिया जाता था।
क्यों लिया गया यह फैसला?
- IOC अब सभी खेलों के लिए एक एकसमान नीति चाहता है, ताकि अलग-अलग खेल संगठन अलग-अलग नियम न बनाएं।
- कई खेल संगठनों ने पहले ही ट्रांसजेंडर एथलीट्स पर पाबंदी लगा रखी है।
- यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महिला खेलों संबंधी कार्यकारी आदेश के बाद आया है।
- IOC का मानना है कि SRY जीन टेस्ट सबसे सटीक और कम दखल देने वाला तरीका है
- यह बदलाव खेलों में निष्पक्षता यानी फेयर कॉम्पिटिशन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
- यह नियम निष्पक्षता, सुरक्षा और महिला वर्ग की अखंडता को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
- यह नियम केवल प्रोफेशनल खेलों पर लागू होगा, जमीनी स्तर (ग्रासरूट) के खेलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।IOC प्रेसिडेंट बोलीं- जीत-हार में बहुत कम अंतर होता हैIOC की प्रेसिडेंट कर्स्टी कोवेंट्री ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि ओलिंपिक जैसे बड़े मंच पर जीत और हार के बीच बहुत मामूली अंतर होता है। उन्होंने कहा,’ओलंपिक खेलों में छोटे से छोटा फासला भी जीत और हार तय कर सकता है। ऐसे में बायोलॉजिकल पुरुषों का महिला कैटेगरी में मुकाबला करना उचित नहीं होगा।’रिसर्च का हवाला: जन्म से पुरुष होने पर मिलता है फिजिकल एडवांटेजIOC ने अपनी इस नीति के पीछे वैज्ञानिक रिसर्च का भी हवाला दिया है। रिसर्च के अनुसार, जन्म से पुरुष होने के कारण एथलीट को स्ट्रेंथ (ताकत), एंड्योरेंस (सहनशक्ति) और पावर आधारित खेलों में शारीरिक रूप से स्थायी बढ़त या एडवांटेज मिलता है। संस्था का मानना है कि हार्मोनल बदलावों के बावजूद यह शारीरिक अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होता।
पेरिस ओलिंपिक में दो बॉक्सरों की भागीदारी पर उठे थे सवाल
पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान दो महिला बॉक्सरों की भागीदारी को लेकर विवाद सामने आया था। 66 किलोग्राम वर्ग में अल्जीरिया की इमान खलीफ और 57 किलोग्राम वर्ग में ताइवान की लिन यू टिंग के खेलने पर अन्य खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई थी। ताइवानी बॉक्सर लिन यू-टिंग को 2023 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) द्वारा किए गए जेंडर संबंधी जांच में असफल घोषित किया गया था। इसके बावजूद IOC ने उन्हें पेरिस ओलिंपिक में महिला 57 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने की अनुमति दी, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। उनकी पात्रता को लेकर कुछ खिलाड़ियों और IBA ने सवाल उठाए थे, हालांकि IOC ने इन प्रक्रियाओं को विश्वसनीय नहीं माना।
इसी तरह, इमान खलीफ को भी 2023 में IBA द्वारा जेंडर संबंधी जांच में अयोग्य घोषित किया गया था। IBA ने उन्हें 2023 में दिल्ली में आयोजित महिला विश्व चैंपियनशिप के गोल्ड मेडल मुकाबले में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी थी।

पेरिस ओलिंपिक में 66 किलो वेट में इटली की एंजेला कैरिनी ने अल्जीरिया की इमान खलीफ के जेंडर को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने मैच के बाद उनसे हाथ मिलाने से इंकार कर दिया था।
अल्जीरिया की इमान खलीफ ने 2024 के पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं की 66 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।

ताइवान की बॉक्सर लिन यू टिंग ने 2024 के पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं की बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड जीतने के बाद जेंडर और खेल से जुड़े सार्वजनिक विवाद का हिस्सा बन गई थीं।
जेंडर टेस्ट सबसे पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने अनिवार्य किया था जेडस टेस्ट को वर्ल्ड वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने अनिवार्य किया था। पिछले साल SRY जीन टेस्ट लागू किया था। ये नियम 1 सितंबर 2025 से लागू हो गया। वहीं पिछले साल सितंबर में हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में टेस्ट पास करने वाली महिला खिलाड़ियों को ही भाग लेने दिया गया था।
एथेटिक्स में दो महिला एथलीटों के जेंडर को लेकर उठा था विवाद

DSD एथलीटों पर भी पड़ेगा असर, कास्टर सेमेन्या ने बताया ‘पीछे की ओर कदम’ यह नियम केवल ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन खिलाड़ियों पर भी लागू होगा जिनके शरीर में ‘डिफरेंस ऑफ सेक्स डेवलपमेंट’ (DSD) की स्थिति है। यानी वे एथलीट जिनके पास सामान्य महिला XX क्रोमोसोम नहीं हैं। दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज धाविका कास्टर सेमेन्या जैसे एथलीट इससे प्रभावित होंगे। सेमेन्या ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘बहिष्कार का नया नाम’ और ‘पीछे की ओर मुड़ने वाला कदम’ बताया है।
सेमेन्या 2012 लंदन ओलिंपिक और 2016 रियो ओलिंपिक में महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था। साथ ही 2024 पेरिस ओलिंपिक में अल्जीरिया की बॉक्सर इमान खलीफ ने 66 किलो वेट में गोल्ड जीता था।
नियम के विरोध की आशंका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया में महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर एथलीटों की भागीदारी को लेकर बहस चल रही है। अमेरिका ने भी हाल ही में महिला खेलों में सख्त नियमों को लेकर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया था। हालांकि IOC का कहना है कि यह निष्पक्षता के लिए जरूरी है, लेकिन मानवाधिकार समूहों और एक्टिविस्ट्स की ओर से इस फैसले की आलोचना होने की भी पूरी संभावना है।
