
श्रीगंगानगर। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर किसानों जिला कलेक्ट्रेट पर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर किसानों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
सरकारी नीतियों और मौसम से बढ़ा नुकसान ग्रामीण किसान मजदूर समिति (जीकेएस) के प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह राजू ने कहा कि लगातार खराब मौसम और नई सरकारी नीतियों के कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो रही है, जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की कि प्रति किसान खरीद सीमा 5 क्विंटल से बढ़ाकर 15 क्विंटल की जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
उत्पादन आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप किसानों ने आरोप लगाया – पटवार सर्किल के अनुसार उत्पादन अलग-अलग दर्ज किया जा रहा है और कई स्थानों पर वास्तविक उत्पादन से काफी कम आंकड़े दिखाए जा रहे हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो रही है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बारिश से गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित, छूट की मांग जिले में लगातार हो रही बारिश से गेहूं की फसल के रंग और गुणवत्ता पर असर पड़ा है। किसानों ने मांग की कि ऐसी परिस्थितियों में गुणवत्ता के मापदंडों में छूट दी जाए, जैसा कि पिछले वर्षों में किया जाता रहा है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में सरकार को राहत देनी चाहिए।
खरीद लक्ष्य बढ़ाने की उठी मांग किसानों ने बताया कि सरकार ने श्रीगंगानगर जिले के लिए मात्र 49 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि अनुमानित उत्पादन करीब 80 लाख टन है। ऐसे में बड़ी मात्रा में फसल बिना खरीदे रह सकती है। किसानों ने मांग की कि खरीद लक्ष्य को तुरंत बढ़ाया जाए, ताकि पूरी फसल की खरीद सुनिश्चित हो सके।
नई पंजीकरण प्रक्रिया पर उठे सवाल प्रदर्शन के दौरान किसानों ने नई पंजीकरण प्रक्रिया को अव्यवहारिक बताते हुए विरोध जताया। उनका कहना है कि पहले की तरह किसान अपनी फसल मंडी में लाकर गिरदावरी के आधार पर बिक्री कर सकते थे, जो अधिक सरल और प्रभावी व्यवस्था थी। उन्होंने मांग की कि उसी पुरानी प्रक्रिया को फिर से लागू किया जाए।
जनआधार नियम पर भी आपत्ति किसानों ने यह भी कहा कि नई गाइडलाइन के अनुसार बिल बनाते समय जनआधार कार्ड से जुड़े सदस्य की उपस्थिति जरूरी है, जबकि अधिकांश जमीन बुजुर्गों या महिलाओं के नाम पर है। ऐसे में फसल बेचने के दौरान यह नियम व्यवहारिक नहीं है। किसानों ने उदाहरण देते हुए कहा कि हरियाणा में भी इस तरह का नियम लागू किया गया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा।
उग्र आंदोलन की चेतावनी किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते गेहूं की खरीद उचित दर पर नहीं की गई और उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य और केंद्र सरकार की होगी।
