
श्रीगंगानगर ।जिले में आज (सोमवार) सुबह से जिले की सभी 15 कृषि उपज मंडियां बंद हैं। एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद की नई प्रक्रिया के विरोध में किसान और व्यापारी संगठनों ने एक साथ मोर्चा खोल दिया। दी गंगानगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, कच्चा आढ़तिया संघ, जिला खाद्य संघ समेत कई किसान संगठनों ने समर्थन देते हुए मंडियों को बंद किया।
6 व्यापारी भूख हड़ताल पर बैठे
श्रीगंगानगर धान मंडी में स्थित कृषि उपज मंडी समिति 6 व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी और धरने पर बैठ गए। मंडी के चारों गेट बंद कर दिए गए हैं। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं भरकर मंडी पहुंचे, लेकिन फसल की बोली नहीं लग सकी। बाहर किसानों की भारी भीड़ जमा रही। इधर, व्यापारियों ने FCI की खरीद के कार्यों का बहिष्कार कर दिया है।
पूरे जिले में पदमपुर, लालगढ़ जाटान, सूरतगढ़, रावला, अनूपगढ़, घड़साना, रायसिंहनगर, श्रीविजयनगर सहित सभी मंडियों में गेहूं की खरीद, लिफ्टिंग और फसलों की बोली पूरी तरह बंद रही।
नई प्रक्रिया पर जताई आपत्ति
दी गंगानगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्रपाल आहूजा ने कहा- व्यापारियों ने सरकारी रेट पर गेहूं खरीद की नई प्रणाली में बायोमेट्रिक की मांग मान ली है, लेकिन बाकी शर्तें स्वीकार नहीं हैं। हम पुराने पैटर्न पर ही खरीद चाहते हैं। किसान भी यही चाहता है। सरकार की हठधर्मिता के कारण आज यह स्थिति बनी है।
किसानों को फसल बेचने में दिक्कत
खाद्य व्यापार संघ के जिला अध्यक्ष कुलदीप कासनिया ने कहा- पुरानी पॉलिसी में न किसानों को दिक्कत थी, न व्यापारियों को। सरकार ने अपनी मनमानी से नई प्रक्रिया थोप दी, जिससे पूरा सिस्टम अस्त-व्यस्त हो गया। आज बैसाखी पर जिले में करीब 25 लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं मंडियों में पहुंचा है, लेकिन व्यापारियों ने खरीद नहीं की। मुहूर्त के हिसाब से सिर्फ 200-400 क्विंटल ही खरीद हो सकी।
बैसाखी पर पहुंची फसल, खरीद सीमित
कच्चा आढ़तिया संघ के अध्यक्ष राय सिंह कुलड़िया ने कहा- नई पॉलिसी खरीद को जटिल बना रही है और फसल बेचने में भारी असुविधा हो रही है। जब पंजाब में पुराने पैटर्न पर गेहूं की सरकारी खरीद हो रही है, तो श्रीगंगानगर में क्यों नहीं हो रही। सरकार से मांग है कि तत्काल पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए। अन्यथा प्रदेशभर में किसान, व्यापारी उग्र आंदोलन करेंगे।
