
हनुमानगढ़। शिविरा पंचांग में ग्रीष्म अवकाश की अवधि में कटौती सहित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) जिला शाखा हनुमानगढ़ द्वारा जिला कलैक्ट्रैट पर विरोध दर्ज करवाते हुए जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री के नाम जिलाध्यक्ष दीपक बारोटिया के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 18 मई से निदेशालय माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
ज्ञापन में बताया गया कि शिक्षा विभाग द्वारा ग्रीष्मावकाश को कम करते हुए 21 जून से विद्यालय पुनः संचालन के आदेश जारी किए गए हैं, जो प्रदेश की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए अव्यवहारिक है। राजस्थान में जून माह के अंतिम सप्ताह तक अत्यधिक गर्मी रहती है, जिससे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। संगठन ने मांग की कि ग्रीष्म अवकाश 30 जून 2026 तक पूर्ववत रखा जाए तथा संस्था प्रधान के विवेकाधीन अवकाश को पुनः दो दिन किया जाए।
संगठन ने यह भी कहा कि विभाग में लंबे समय से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं होने से शिक्षकों में असंतोष है। उन्होंने पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने, एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता एवं गंभीर रोग से ग्रसित शिक्षकों को प्राथमिकता देते हुए राहत प्रदान करने की मांग की। इसके साथ ही विभिन्न संवर्गों की लंबित डीपीसी एवं उप-प्राचार्य पद की पुनः बहाली की भी मांग उठाई गई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 1997 से रोस्टर रजिस्टर का संधारण नहीं किया गया है, जिससे आरक्षित वर्ग के पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने इस दिशा में शीघ्र कार्यवाही की मांग की।
छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूर्व मैट्रिक एवं उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि को वर्तमान महंगाई के अनुरूप कम से कम पांच गुना बढ़ाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके अतिरिक्त शिक्षकों को बीएलओ, जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखते हुए केवल शिक्षण कार्य में लगाए जाने की मांग की गई।
संगठन ने यह भी कहा कि प्रदेश में नवगठित ग्राम पंचायतों के विद्यालयों को उच्च माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत किया जाए तथा आवश्यक संसाधन और स्टाफ उपलब्ध करवाया जाए।
राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) ने सरकार द्वारा 1 अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत और समय पर परीक्षा परिणाम घोषित करने की पहल का स्वागत किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि ग्रीष्मावकाश में कटौती जैसे निर्णय शिक्षकों और विद्यार्थियों के हित में नहीं हैं।
अंत में संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस मौके पर प्रेमाराम, राकेश सकरवाल पूनम चंद सांखला, धनराज लोहिया महेंद्र पाल सिंह, भोलेनाथ, राजेंद्र मांड्या, राजकुमार बनिया, जोगेंद्र सिंह, हीरालाल लोहिया, रामस्वरूप बनिया, महेंद्र गांधी, श्रवण कुमार, दानाराम इंदलिया , राधेश्याम मेहरा , कर्ण सिंह चौहान, विजेंद्र पाटोदिया सहित अन्य शाखाओं के साथी उपस्थित रहे।
