
हनुमानगढ़। जिले की ग्राम पंचायत धोलीपाल में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। पिछले दो महीनों से ग्रामीण लगातार 181 हेल्पलाइन, सूचना के अधिकार अधिनियम, पंचायत समिति, जिला परिषद और जिला कलेक्टर को शिकायतें दे रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उक्त संबंध में भ्रष्ट्राचार निरोधक ब्यूरों में शिकायत कर ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीण आशीष कुमार का आरोप है कि पंचायत के प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं की हैं। आरोपों के अनुसार पिछले दो वर्षों में हुए निर्माण कार्यों, स्वीकृतियों और भुगतान में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि अप्रैल 2024 से मार्च 2026 तक के सभी आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा, केस बुक, बिल वाउचर, मस्टरोल, प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियों सहित समस्त दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।
मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने स्वामित्व योजना में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्वामित्व सर्वे के दौरान दस्तावेजों की जांच के नाम पर लोगों को पंचायत या घर पर बुलाकर उनके कागजात अपने पास रख लिए गए और बाद में प्लॉटों को गलत दर्शाकर पुनः नाम दर्ज कराने के नाम पर पैसे लिए गए। आरोप है कि कई खाली प्लॉट और मकान प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी की मिलीभगत से उनके परिचितों और रिश्तेदारों के नाम दर्ज कर दिए गए हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सरपंच के कार्यभार संभालने के बाद कई पटाधारियों को अवैध घोषित कर नोटिस जारी किए गए और अतिक्रमण हटाने के नाम पर दबाव बनाया गया। बाद में कथित रूप से पैसे लेकर कुछ पटों को नियमित कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में लेन-देन की आशंका जताते हुए ग्रामीणों ने प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति के बयान लेने की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की गई है, उन्हें ही जांच कमेटी में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम हो जाती है। इसके अलावा अब तक जांच दल द्वारा मौके पर जाकर तथ्यात्मक जांच नहीं किए जाने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
निर्माण कार्यों में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राथमिक अनुभाग में शेड निर्माण और ओपन जिम निर्माण कार्य में वित्तीय और तकनीकी गड़बड़ियों का आरोप है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में शेड का निर्माण नहीं हुआ, जबकि राशि खर्च दिखा दी गई। वहीं ओपन जिम में बिना टेंडर के उपकरण खरीदे गए और मानकों से अधिक राशि के बिल लगाए गए। वर्तमान में जिम जर्जर स्थिति में है।
इसके अलावा पंचायत द्वारा कूलर, एसी, वाटर कूलर, कुर्सियां और अन्य सामग्री की खरीद में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। बारिश के दौरान पानी निकासी के नाम पर भी बड़ी राशि खर्च दिखाने पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कहीं पानी भराव की स्थिति नहीं थी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत के राजकोष से राशि निजी खातों में ट्रांसफर की गई और फर्जी बिल व वाउचर लगाकर पैसा निकाला गया। मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग भी उठाई गई है, क्योंकि कई कार्य कागजों में ही पूरे दिखाए गए हैं।
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई तो वे मुख्यमंत्री स्तर तक इस मामले को लेकर जाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते जांच हुई तो भ्रष्टाचार के सभी तथ्य सामने आ सकते हैं, अन्यथा सबूत मिटने की आशंका है।
इस मौके पर आशीष कुमार, शीशपाल, अमर, विजय कुमार, सुखचरण सिंह, ओमप्रकाश, विकास सहु, बलजीत सिंह, सचिन कुमार, रामकुमार, बिटू सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
