
हनुमानगढ़। राजस्थान में कपास की खेती को सशक्त बनाने और किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध करवाने के प्रयासों के तहत हनुमानगढ़ कृषि संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व सिंचाई मंत्री डॉ. रामप्रताप से मिला। इस दौरान संगठन ने बीटी कॉटन की स्वीकृति को लेकर किए जा रहे प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
संगठन के अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात में किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. रामप्रताप को गुलदस्ता भेंट कर उनका अभिनंदन किया और बीटी कॉटन को राजस्थान में आधिकारिक मंजूरी दिलाने के लिए उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि डॉ. रामप्रताप हमेशा से किसानों की आवाज को मजबूती से उठाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि बीटी कॉटन को स्वीकृति मिलती है तो इससे कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ होगा। फसल की पैदावार बढ़ेगी, लागत में कमी आएगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि उन्नत तकनीक और प्रमाणित बीजों के उपयोग से गुलाबी सुंडी जैसी गंभीर समस्याओं से निपटना संभव हो सकेगा, जो पिछले कुछ वर्षों में कपास की फसल के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। किसानों ने उम्मीद जताई कि बीटी कॉटन के आने से उत्पादन में स्थिरता आएगी और नुकसान कम होगा।
पूर्व मंत्री डॉ. रामप्रताप ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे किसानों की समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की खुशहाली ही उनकी प्राथमिकता है और बीटी कॉटन की स्वीकृति के लिए वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि हनुमानगढ़ सहित पूरे प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
इस अवसर पर कृषि संगठन के पदाधिकारी और क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में डॉ. रामप्रताप के मार्गदर्शन और सहयोग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
बैठक में प्रमुख रूप से पुरुषोत्तम शर्मा, जयपाल सियाग, नरेंद्र कंबोज, विष्णु गुप्ता, लालचंद घोटिया, एनके पूनिया, अमर शर्मा, बिहारी लाल सहू, हरविंदर मान, गुरदास सहित अन्य किसान एवं व्यापारी वर्ग से सुरेंद्र बलाड़िया, साहिल बलाड़िया, चरणजीत धींगड़ा, विजय सिंह पहलवान और कुणाल लाखोटिया आदि मौजूद रहे।
