
हनुमानगढ़। रबी सीजन 2026-27 के आगमन के साथ ही मंडी हनुमानगढ़ टाउन में गेहूं खरीद को लेकर चिंताजनक स्थिति बनती नजर आ रही है। फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन हनुमानगढ़ ने जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को ज्ञापन भेजकर समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की व्यवस्थाओं में कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल समाधान की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल ने विधायक गणेशराज बंसल को प्रेषित ज्ञापन में बताया कि जिला प्रशासन द्वारा मंडी यार्ड को पांच ब्लॉकों में विभाजित कर लॉटरी के माध्यम से विभिन्न खरीद एजेंसियों को आवंटन किया गया है। गत वर्ष हनुमानगढ़ टाउन मंडी में लगभग 15 लाख क्विंटल (30 लाख कट्टे) गेहूं की खरीद MSP पर की गई थी, जबकि जिले की अन्य मंडियों—हनुमानगढ़ जंक्शन, पीलीबंगा, संगरिया व टिब्बी—को मिलाकर करीब 50 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद हुई थी।उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा समय रहते बारदाना, उठाव, परिवहन व हैंडलिंग (HTA) की समुचित व्यवस्था कर खरीद प्रक्रिया को सफल बनाया गया था, जिससे किसानों व व्यापारियों को समय पर भुगतान भी सुनिश्चित हुआ। लेकिन इस वर्ष स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि FCI सहित अन्य खरीद एजेंसियों द्वारा अब तक हैंडलिंग व ट्रांसपोर्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई है और न ही मंडियों में पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। सबसे बड़ी समस्या बारदाने की है, जिसकी उपलब्धता मात्र 12 से 15 प्रतिशत तक सीमित बताई जा रही है। इससे किसानों, व्यापारियों और मजदूरों में भय व असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालांकि FCI द्वारा टाउन मंडी में किस्म निरीक्षक की नियुक्ति कर भंडारण केंद्र तैयार कर लिए गए हैं, लेकिन अन्य एजेंसियों की तैयारी को लेकर स्पष्टता का अभाव है। मंडी व्यापारियों का कहना है कि एजेंसियों से समुचित संवाद नहीं होने के कारण स्थिति और अधिक भ्रमपूर्ण हो गई है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल 2026 से गेहूं की आवक एक साथ शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यदि समय रहते बारदाना, परिवहन व अन्य व्यवस्थाएं नहीं की गईं तो मंडी में अव्यवस्था फैल सकती है। उन्होंने मांग की है कि शीघ्र HTA टेंडर प्रक्रिया पूरी कर एजेंसियों की नियुक्ति की जाए और पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया जाए।
वहीं एसोसिएशन के सचिव दलीप सिंह ढिल्लो ने खाद्य सचिव, राजस्थान सरकार को भेजे ज्ञापन में गेहूं खरीद के लिए लागू स्लॉट सिस्टम पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण के बाद किसानों को गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक करना अनिवार्य किया गया है, जिसके अनुसार निर्धारित तिथि पर ही किसान अपनी फसल मंडी में बेच सकता है। उन्होंने कहा कि गेहूं का सीजन बहुत छोटा, लगभग 15 दिनों का होता है, जबकि नरमा कपास का सीजन कई महीनों तक चलता है। ऐसे में स्लॉट व्यवस्था गेहूं के लिए व्यावहारिक नहीं है। किसानों के पास भंडारण की पर्याप्त सुविधा नहीं होती, इसलिए वे कटाई के तुरंत बाद ही फसल मंडी में लेकर आते हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कम्बाइन मशीनों की उपलब्धता के अनुसार ही कटाई संभव होती है, जो स्लॉट तिथि से मेल नहीं खा पाती। इससे किसान समय पर मंडी नहीं पहुंच पाता और MSP का लाभ लेने से वंचित रह सकता है। एसोसिएशन ने मांग की है कि गेहूं खरीद में स्लॉट व्यवस्था को शिथिल किया जाए और खरीद एजेंसियों को निर्देशित किया जाए कि वे किसानों से लचीले तरीके से खरीद करें। साथ ही भंडारण केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि किसान अधिक मात्रा में अपनी फसल मंडी में ला सके। कुल मिलाकर, किसानों, व्यापारियों और मजदूरों ने प्रशासन व सरकार से आग्रह किया है कि समय रहते ठोस कदम उठाकर गेहूं खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे सरकार की MSP योजना का पूरा लाभ उठा सकें। इस मौके पर फूडग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल, सचिव दिलीप सिंह ढिल्लों, उपसचिव आशीष गोदारा, कोषाध्यक्ष प्रवीण तलवाडिया, कृष्णा घोड़ेला, बालकिशन करमचंदानी, राजेश सिंगला, सन्नी जुनेजा अशोक नागपाल, सोहन सिंह, हरदयाल सिंह, पवन खदरिया, सूरजभान मित्तल, विकास हिसारिया, विपिन गोयल, पुलकित मित्तल, यशपाल सिंगला, नंदलाल खीचड़,गुरजीवन सिंह सिद्धू, रमेश कारगवाल, लवप्रीत सिंह, विनय गर्ग, शिवम गर्ग, जतिन हिसारिया, सुमित गर्ग,मुकेश साई, दिशान्त सर्राफ, प्रिंस सर्राफ आदि उपस्थित थे ।
