
हनुमानगढ़ । टाउन में सिंधी समाज की सक्रिय संस्था जय श्री झूलेलाल नारी शक्ति द्वारा सिंधी भाषा दिवस एवं दाल पकवान दिवस का भव्य आयोजन सेंट्रल पार्क में किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का प्रदर्शन किया। जय श्री झूलेलाल नारी शक्ति की सदस्य वर्षा करमचंदानी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 10 अप्रैल का दिन सिंधी भाषा और संस्कृति को सुरक्षित रखने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल 1967 को सिंधी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जो पूरे सिंधी समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि 27 जुलाई 1988 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा भारतीय संविधान का सिंधी भाषा में अनुवाद किया गया, जिससे सिंधी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।कार्यक्रम के दौरान दाल पकवान दिवस भी मनाया गया, जो सिंधी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और पारंपरिक प्रतीक है। सभी महिलाओं ने मिलकर दाल पकवान का आनंद लिया और आपसी भाईचारे व सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। वर्षा करमचंदानी ने बताया कि हनुमानगढ़ में दाल पकवान दिवस मनाने की शुरुआत झूलेलाल नारी शक्ति द्वारा लगभग चार वर्ष पूर्व की गई थी, जो अब हर वर्ष उत्साह के साथ मनाया जाता है।
संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिन पूर्व रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सिंधी सभ्यता की झलक देखने को मिली। आज के मुख्य कार्यक्रम में सभी नारी शक्ति की बहनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना रहा। उपस्थित सभी महिलाओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करती रहेंगी।
