
हनुमानगढ़, । जिले में किसानों को राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए क्रय-विक्रय सहकारी समिति, हनुमानगढ़ द्वारा आज समर्थन मूल्य पर चना खरीद का विधिवत शुभारम्भ किया गया। यह खरीद कार्य रिकॉ स्थित सहकारी समिति परिसर में प्रारम्भ किया गया, जहां किसानों से 5875 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर चना खरीदा जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान समिति चैयरमैन प्रेम कुमार गोदारा, भाजपा नेता अमित सहू, समिति मुख्य व्यवस्थापक अभिषेक महिया, खरीद प्रभारी सुरेन्द्र कुमार एवं संचालक सदस्य कपिल गोदारा ने प्रथम किसान इन्द्रसैन डोटासरा (पुत्र श्री लाधूराम डोटासरा) का माला पहनाकर स्वागत किया और इस पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और किसान मौजूद रहे, जिनमें सरपंच बलदेवसिंह चिस्तियां, सुक्खासिंह मक्कासर, बलदेवसिंह गुरदीपसिंह जोड़किया सहित समिति कर्मचारी और अन्य किसान शामिल थे।
समिति चैयरमैन प्रेम कुमार गोदारा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में चना खरीद की यह योजना चलाई जा रही है, जिससे उन्हें बाजार के कम दामों से राहत मिलेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण करवाकर इस योजना का लाभ उठाएं, ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके।
भाजपा नेता अमित सहू ने इस मौके पर समिति परिसर में निर्माणाधीन 500 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम का निरीक्षण भी किया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष जताते हुए कहा कि भविष्य में भी सरकार के सहयोग से समिति के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
समिति चैयरमैन ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों की मांग पर चना खरीद के लिए पुनः 10 अप्रैल से पंजीकरण शुरू किया गया है। अब तक हनुमानगढ़ टाउन केन्द्र पर 38 किसानों और हनुमानगढ़ जंक्शन केन्द्र पर 19 किसानों ने चना बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। इसके अलावा सरसों के लिए कुल 321 पंजीकरण हुए हैं।
हालांकि, वर्तमान में सरसों के बाजार भाव समर्थन मूल्य से अधिक होने के कारण किसान सरसों को समर्थन मूल्य पर बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चना के बाजार भाव अपेक्षाकृत कम होने के कारण किसान समर्थन मूल्य पर चना बेचने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस पहल से जिले के किसानों को न केवल उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थिरता और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। सहकारी समिति द्वारा की गई यह शुरुआत किसानों के लिए राहतभरी साबित हो रही है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
