
श्रीगंगानगर । धाणका समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) का जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग को लेकर जिले की धान मंडियों में तीसरे दिन भी काम पूरी तरह ठप रहा।
सादुलशहर में समाज के लोगों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा धारण कर विरोध-प्रदर्शन किया और धान मंडी से शहर तक आक्रोश रैली निकाली। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
धाणका समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन उनकी मांगों को लगातार अनदेखी कर रहा है। उन्होंने बताया- हम 250 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन हमारी आवाज नहीं सुन रहा। प्रमाण-पत्र न मिलने से हमारे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए हम तैयार हैं।
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
समाज के लोगों ने बताया कि ST प्रमाण-पत्र न मिलने के कारण बच्चों को आरटीई कोटे में स्कूल एडमिशन नहीं हो पा रहा है। बीएड और बीएसटीसी जैसे कोर्सों में दाखिला अटका हुआ है। गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि सरकारी और अर्धसरकारी नौकरियों के अवसर भी उनके लिए बंद हो गए हैं। यह सिर्फ एक कागज की लड़ाई नहीं है, बल्कि हमारे वजूद और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की लड़ाई है।
धाणका जनजाति संघर्ष समिति के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि 1976 के भारत सरकार गजट नोटिफिकेशन के आधार पर पुराने प्रमाण-पत्रों को मान्यता देकर तुरंत डिजिटल ST सर्टिफिकेट जारी किए जाएं।
