
हनुमानगढ़। कृषि उपज मंडी के अंतर्गत डबली राठान गेहूं खरीद केंद्र पर इन दिनों व्यापारी वर्ग और ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कमर्शियल ट्रैक्टर-ट्रॉली से गेहूं की लोडिंग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब आंदोलन का रूप ले चुका है, जिससे मंडी का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
आज सीटू यूनियन और जिला प्रशासन के मध्य उक्त संबंध में वार्ता हुई जो की बेनतीजा रही।
जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद विधिवत कमर्शियल लाइसेंस प्राप्त किया है। इसके लिए प्रत्येक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर करीब 35 हजार रुपये तक का खर्च भी किया गया है। यूनियन से जुड़े चालकों का दावा है कि वे स्थानीय डबली राठान के मजदूर हैं और पिछले करीब 20 वर्षों से, जब से मंडी स्थापित हुई है, गेहूं ढुलाई का कार्य करते आ रहे हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन का कहना है कि हाल ही में उनका ट्रांसपोर्ट ठेकेदार के साथ समझौता भी हो चुका है, जिसके तहत लोडिंग का कार्य ट्रैक्टर-ट्रॉली से ही किया जाना तय हुआ है। इसके बावजूद व्यापारी वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है और ट्रॉलियों से गेहूं लोडिंग कराने से इनकार कर रहा है।
दूसरी ओर व्यापारी वर्ग का कहना है कि लोडिंग की व्यवस्था पारंपरिक तरीके और नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब दोनों पक्षों ने मंडी परिसर के अंदर और बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने स्तर पर आंदोलन तेज कर दिया है। मंडी के बाहर और अंदर हड़ताल से संबंधित पंडाल लगाए गए हैं, जहां व्यापारी और ट्रैक्टर-ट्रॉली यूनियन के सदस्य प्रदर्शन कर रहे हैं। इस टकराव के चलते गेहूं की खरीद और उठाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारी वर्ग ने विरोध स्वरूप अपनी दुकानों पर ताला लगा दिया और उनकी चाबियां कृषि उपज मंडी समिति के सचिव प्रवीण मूड को सौंप दी हैं। व्यापारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक वे अपना कामकाज बंद रखेंगे।
इधर प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। दोनों पक्षों के बीच लगातार वार्ता का दौर जारी है, ताकि किसी तरह से समाधान निकाला जा सके और मंडी की व्यवस्था सुचारू रूप से बहाल हो सके। हालांकि समाचार लिखे जाने तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई थी।
स्थानीय स्तर पर यह विवाद अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका सीधा असर गेहूं खरीद प्रक्रिया पर पड़ेगा, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वह निष्पक्ष मध्यस्थता कर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनवाए और मंडी में सामान्य स्थिति बहाल करे।
