
हनुमानगढ़। राजस्थान में पंचायतों एवं नगरीय निकायों के लंबे समय से लंबित चुनावों को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी क्रम में पंचायतीराज दिवस के उपलक्ष में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के बैनर तले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय से जिला कलैक्ट्रैट तक रोष मार्च निकाला, जिसके बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र चुनाव कराने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के जिलाध्यक्ष वारिस अली ने बताया कि प्रदेश व केन्द्र की सरकार लोकतंत्र की हत्या करने पर जुटी है। संविधान के अनुसार पांच वर्ष बाद चुनाव करवाने व लोगों को उनके मतों का उपयोग करना आवश्यक होता है, परन्तु सात बरस बीतने के बाद भी सरकार चुनावों में देरी कर रही है। निकाय चुनाव को दो वर्ष व पंचायतीराज चुनाव में एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव लंबित होने के कारण स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष मनीष मक्कासर ने कहा कि पंचायतों और नगरीय निकायों के स्थान पर प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे जनता की भागीदारी और जवाबदेही कमजोर हुई है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से चिंता का विषय है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243ई और 243यू का हवाला देते हुए बताया कि पंचायतों और नगरीय निकायों का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित है और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। वहीं अनुच्छेद 243ज्ञ के तहत राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ज्ञापन में कहा गया कि चुनाव कराना सरकार की विवेकाधीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है।
ज्ञापन में न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। सर्वाेच्च न्यायालय के वर्ष 2021 के एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया गया था कि परिसीमन या प्रशासनिक कारणों को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा फरवरी, मार्च और नवंबर 2025 में चुनाव कराने के निर्देश दिए गए थे। 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने की अंतिम समयसीमा निर्धारित की थी, जिसे सर्वाेच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा। इसके बावजूद चुनाव नहीं कराए जाना न्यायालय की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है।
ज्ञापन में वर्तमान स्थिति के दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया। इसमें कहा गया कि चुनाव नहीं होने से नागरिकों के मताधिकार का हनन हो रहा है और स्थानीय स्वशासन प्रणाली कमजोर पड़ रही है। साथ ही 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की मूल भावना को भी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे लोकतांत्रिक जवाबदेही में गिरावट आ रही है।
संगठन ने अपनी मांगों में पंचायतों एवं नगरीय निकायों के चुनाव शीघ्र कराने, राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र एवं प्रभावी रूप से कार्य करने के निर्देश देने, न्यायालय के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने तथा प्रशासकों के स्थान पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बहाली की मांग रखी।
इस अवसर पर राजीव गांधी पंचायती राज संगठन जिलाध्यक्ष वारिस अली, मनीष मक्कासर , पूर्व जिला प्रमुख कविता मेघवाल, जयदेव भीड़ासरा, कुलविन्दर सिंह सिद्धू, महेंद्र जाखड़, कालूराम गोदारा, करणी सिंह राठौड़, रामेश्वर लाल चांवरिया, महिला जिलाध्यक्ष सुलोचना बावरी, एससी जिलाध्यक्ष सीताराम कड़वा, ओबीसी प्रदेश कोडिनेटर गुरदीप चहल, सोहन लदोईया महासचिव, आरिफ ख़ान, अब्दुल मजीद रफीक भाटी, आमिर खान जगदीश इंदलिया, गुरप्रीत मान सरपंच, महेंद्र सांगवाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
