
श्रीगंगानगर।राजस्थान बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता और वामपंथी विचारधारा के प्रखर ध्वजवाहक नवरंग चौधरी (73) का आज सुबह सीकर से श्रीगंगानगर आ रही रेलगाड़ी में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से अधिवक्ता जगत, बार एसोसिएशन और जन संघर्ष के क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त हो गया है।
नवरंग चौधरी मूल रूप से सीकर जिले के निवासी थे। वे अपने गांव गए हुए थे और आज सुबह लगभग 3 बजे ट्रेन से श्रीगंगानगर के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान ट्रेन में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। ट्रेन जब हनुमानगढ़ पहुंची तो सहयात्रियों ने जीआरपी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को हनुमानगढ़ टाउन सिविल अस्पताल पहुंचाया जहां पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया। दोपहर में शव श्रीगंगानगर लाया गया। पुरानी आबादी में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के समीप स्थित उनके निवास पर शोक व्यक्त करने वालों का लगातार तांता लगा हुआ है।
निधन की खबर सुबह करीब 10 बजे श्रीगंगानगर पहुंचते ही राजस्थान बार काउंसिल और श्रीगंगानगर बार एसोसिएशन ने शोक स्वरूप समस्त न्यायिक कार्य स्थगित कर दिए। श्रीगंगानगर से बड़ी संख्या में अधिवक्ता हनुमानगढ़ पहुंचे। श्रीगंगानगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हंसराज तनेजा, पूर्व अध्यक्ष अजय मेहता, भूरामल स्वामी,विजय रेवाड, जसवीरसिंह मिशन, विजयपाल चावला, सीताराम बिश्नोई, मोहनलाल माहर, दलबारासिंह बराड़, संजय धारीवाल,रजत स्वामी सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं विधानसभा चुनाव प्रत्याशी अंकुर मगलानी, अखिल भारतीय ग्रामीण एवं खेत मजदूर यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा स्वामी,माकपा नेता श्योपतराम मेघवाल, धर्मेंद्र शर्मा एडवोकेट, किसान नेता रविंद्र तरखान, किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष कौरसिंह सिद्धू, ने गहरा दुख व्यक्त किया। बार एसोसिएशन ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
नवरंग चौधरी श्रीगंगानगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके थे। वे तीन बार राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य चुने गए और एक बार काउंसिल के अध्यक्ष का पद भी सुशोभित किया। पिछले हफ्ते हुए राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव में वे फिर से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रहे थे, लेकिन एक नए नियम के कारण उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जगह श्रीगंगानगर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष चरणदास कंबोज को मैदान में उतारा और पूरे राजस्थान में उनके समर्थन में व्यापक जनसंपर्क व प्रचार-प्रसार किया।
वे सीटू मजदूर संगठन के प्रदेश सचिव मंडल के सदस्य तथा श्रीगंगानगर में माकपा के जिला सचिव मंडल के भी सदस्य रहे। वामपंथी विचारधारा से गहरा लगाव रखने वाले नवरंग चौधरी ने दबे-कुचले, पिछड़े और गरीब तबके के मजदूरों के हक-हकूक के लिए आजीवन संघर्ष किया। श्रीगंगानगर में शुरुआती पढ़ाई करने के बाद उन्होंने जयपुर से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। वे लगभग 40 वर्षों से श्रीगंगानगर में वकालत कर रहे थे। वे प्रखर वक्ता के रूप में प्रसिद्ध थे और खुलकर अपने विचार रखने के लिए जाने जाते थे। वकालत के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकदमों में मील के पत्थर गाड़े। अनेक बार पुलिस और कानूनी चुनौतियों का सामना करते हुए वे जेल भी जा चुके थे।
सादगी उनके जीवन का अभिन्न अंग थी। वामपंथी विचारधारा से जुड़ाव के कारण वे ऐशो-आराम और साधन-संपन्नता से दूर रहे। राजस्थान ही नहीं, देश के दूर-दराज इलाकों में वकालत, जन संघर्षों और अधिवक्ताओं की गोष्ठियों के लिए वे साधारण रेलवे और बस यात्रा ही करते थे। आज भी वे साधारण ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, जो दुर्भाग्यवश उनकी अंतिम यात्रा बन गई।
नवरंग चौधरी की तीन विवाहित बेटियां श्रीगंगानगर पहुंच रही हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार को प्रातः 9:00 बजे किया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता चरणदास कंबोज, भाजपा के वरिष्ठ नेता महेश पेडीवाल सहित बड़ी संख्या में लोग हनुमानगढ़ पहुंचे और शव के साथ श्रीगंगानगर आए।अधिवक्ता वर्ग उनके निधन को वकालत, जन आंदोलन और बार काउंसिल आंदोलन के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति मान रहा है। उनके सादगीपूर्ण जीवन, संघर्षशील व्यक्तित्व और प्रखर वक्तृत्व को याद करते हुए सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।
