
श्रीगंगानगर।राष्ट्रीय कला मंदिर द्वारा रविवार शाम चौधरी रामजस सदन ऑडिटोरियम में प्रस्तुत जर्मन लेखक सीग्फ्रीड लेंज के प्रसिद्ध रेडियो नाटक ‘जीट डर शुल्डोजन’ पर आधारित हिंदी नाटक ‘अपराधी’ ने दर्शकों को न सिर्फ मंत्रमुग्ध किया, बल्कि गहरे सोचने पर मजबूर भी कर दिया। इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि ऑडिटोरियम पूरी तरह भर गया, अनेक लोग खड़े होकर नाटक देखने को मजबूर हुए और कई दर्शक बाहर ही रह गए। आयोजकों को मंच से माफी मांगनी पड़ी।नाटक के हिंदी रूपांतरण व निर्देशन की जिम्मेदारी संभालने वाले विजय जोरा ने एक बार फिर साबित किया कि गंभीर और विचारोत्तेजक रंगमंच अभी भी दर्शकों के दिल में जगह बना सकता है। मुख्य अतिथि समाजसेवी अजय बंसल ने नाटक की कथावस्तु और कलाकारों की अभिनय क्षमता की खुलकर तारीफ की। लगभग पौने दो घंटे की इस प्रस्तुति को लोगों ने दम साधे देखा।
मूल जर्मन नाटक ‘समय अपराधियों का’ पर आधारित यह कृति तानाशाही व्यवस्था में आम आदमी की नैतिक दुविधा, अपराधबोध और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के प्रश्न को अत्यंत तीखे अंदाज में उठाती है।कहानी एक युवा क्रांतिकारी की हत्या के प्रयास से शुरू होती है। सुरक्षा बल बिना किसी सबूत के सात साधारण, निर्दोष नागरिकों को गिरफ्तार कर लेते हैं। इन लोगों पर जबरदस्त दबाव डाला जाता है कि वे क्रांतिकारी के साथियों का नाम बताएं या उसे अपना मिशन छोड़ने के लिए राजी करें। डर, यातना और नैतिक द्वंद्व के बीच ये साधारण लोग धीरे-धीरे टूटते जाते हैं। अंत में युवक की हत्या हो जाती है और सातों को रिहा कर दिया जाता है।दूसरा भाग और भी चौंकाने वाला रहा। क्रांति सफल हो जाती है। अब नये शासक उन्हीं सात लोगों को फिर से पकड़ लेते हैं और उनसे हत्यारे का नाम पूछते हैं। भूमिकाएं उलट जाती हैं।नाटक बड़े ही मार्मिक ढंग से सवाल करता है- क्या कोई पूरी तरह निर्दोष हो सकता है? जो अन्याय देखकर चुप रह जाता है, क्या वह भी अपराधी नहीं बन जाता? व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सामूहिक अपराधबोध और सत्ता के दबाव की जटिलताओं को नाटक ने बेहद विचारोत्तेजक तरीके से पेश किया।
नाटक में विभिन्न भूमिकाओं डॉक्टर -ममता आहूजा, बैंक डायरेक्टर ममता पुरी, पुलिस इंस्पेक्टर-ऋतुसिंह, लेखक-मोहन दादरवाल, कैदी-गौरव बलाना, इंजीनियर-अशोक चलाना, ट्रक ड्राइवर-उमंग शर्मा, छात्र नेता-विक्रम मोंगा, इन्वेस्टिगेटर-शिवा चारण, होटलमलिक-चंदन कुशवाह और चौकीदार-भव्य गुप्ता ने सशक्त अभिनय के साथ बखूबी निभाया। विशेष सारस्वत ने मंच पार्श्व,दीपक सारस्वत ने ध्वनि एवं प्रकाश और वैभव आहूजा ने मंच सज्जा की जिम्मेदारी संभाली। राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने बताया कि संस्था की स्थापना के 75 में वर्ष में मूल जर्मन नाटक ‘समय अपराधियों का’ पर आधारित इस प्रस्तुति का उद्देश्य समाज को आईना दिखाना था। मुख्य संरक्षक विजय गोयल, कार्यकारिणी सदस्य दीपक कुक्कड़, सीए विजय अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने नाटक का आनंद लिया। कोषाध्यक्ष निलयकांत शर्मा का विशेष योगदान रहा।मंच संचालन राकेश मोंगा ने किया।इस नाटक ने श्रीगंगानगर में सार्थक रंगमंच की बढ़ती रुचि को एक बार फिर साबित कर दिया।
