
हनुमानगढ़। धाणका/धानका समाज द्वारा जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्या को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। जिले सहित श्रीगंगानगर क्षेत्र में समाज के लोगों में बढ़ते असंतोष के बीच रविवार को भी जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष धरना लगातार 238वें दिन जारी रहा। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर सरकार से शीघ्र समाधान की मांग दोहराई और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 15 अप्रैल 2026 से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 9 अगस्त 2019 को जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस आदेश के कारण समाज के हजारों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार के वर्ष 1976 के गजट नोटिफिकेशन में ‘धाणका’ जाति को राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया गया है। लेकिन स्थानीय स्तर पर ‘ण’ और ‘न’ के उच्चारण में समानता के चलते वर्षों तक सरकारी अभिलेखों में ‘धानका’ लिखा जाता रहा। इसी आधार पर पूर्व में प्रशासन द्वारा जांच कर ‘धानका’ नाम से अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।
समाज के लोगों का आरोप है कि वर्ष 2019 के आदेश के बाद अब केवल वर्तनी के अंतर को आधार बनाकर पुराने प्रमाण पत्रों को अमान्य घोषित किया जा रहा है। इससे युवाओं को शिक्षा, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे एक तकनीकी त्रुटि बताते हुए सुधार की मांग की है।
धरना स्थल पर रविवार को मलोट मंडी के लोगों ने पहुंचकर समाज को पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने तन, मन और धन से आंदोलन में साथ देने का भरोसा दिलाया। इस दौरान आगामी आंदोलन को सफल बनाने के लिए रणनीति भी तैयार की गई।
समाज की प्रमुख मांगों में 2019 के आदेश को निरस्त करना, पुराने ऑफलाइन ‘धानका’ प्रमाण पत्रों को वैध मानते हुए उनके आधार पर डिजिटल ‘धाणका’ (एसटी) प्रमाण पत्र जारी करना, पिता के प्रमाण पत्र को प्रथम दृष्टया साक्ष्य मानकर नई पीढ़ी के प्रमाण पत्र बनाना और प्रमाण पत्र प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है। इसके अलावा केंद्र सरकार के प्रारूप में प्रमाण पत्र जारी करते समय राज्य स्तर के प्रमाण पत्र को ही मान्यता देने की मांग भी रखी गई है।
समाज के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 15 अप्रैल से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले की सभी अनाज मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जाएगा। साथ ही जिला कलेक्ट्रेट और उपखंड कार्यालयों के सामने चक्का जाम और विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
इस मौके पर जितेन्द्र सिंह धाणका, रमेश कुमार, गौरव कुमार, मलोट मंडी से बोबी कुमार, सुरेश कुमार, प्रेम कुमार, सुदेश कुमार, रोशनलाल, सुरज कुमार, प्रेम कुमार व अन्य समाज के लोग मौजूद थे।
अंत में समाज के लोगों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं हो जाता।
