
श्रीगंगानगर । 3 अप्रैल की दोपहर, घड़ी में 3 बजकर 15 मिनट हुए थे। आसमान से ऐसी ‘आफत’ बरसी की कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया।
लगातार 20 मिनट तक (3:35 बजे तक) हुई भारी ओलावृष्टि ने श्रीगंगानगर जिले के 15 से ज्यादा गांवों की तैयार फसलों को बर्बाद करके रख दिया।
गेहूं, सरसों, चना, मेथी, जौ… कुछ नहीं बचा। जहां कल तक सोने जैसी चमकती गेहूं की फसलें लहरा रही थीं, वहां आज सिर्फ किसानों के सिसकने की आवाजें हैं।
फसलें पक चुकी थीं और कुछ ही दिन में किसान कटाई करने वाले थे। जो फसल काटकर खेतों में रखी थी, उसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तक का मौका नहीं मिला। बिचारा किसान अब सरकार से मिलने वाली मदद की ओर टकटकी लगाए है।
5 साल की एक महिला किसान बोली- 2 महीने पहले हुई पति की मौत के सदमे से अभी उबरी नहीं थी। बेहतर फसल की आस में खेतों में कड़ी मेहनत की थी। एक दिन बाद फसल काटने ही वाली थी कि अचानक आई इस आफत ने पूरी फसल तबाह कर दी। अब मेरे 3 बच्चों को पालने का संकट खड़ा हो गया है।
एक किसान ने कहा- लाखों का कर्ज लेकर फसल बोई थी। ओले गिरने से सब बर्बाद हो गया। न गेहूं बचा न चारा, उधार चुकाने के लिए व्यापारी फोन कर रहे हैं, मन करता है सुसाइड कर लूं।
पति की हार्ट अटैक से मौत, अब अकेली खेत संभाल रही
मोकलसर-रोही के चक 92.600 आरडीआर की रहने वाली कैलाश (35) का 15 बीघा में गेहूं खराब हो गया है।
कैलाश बताती हैं- 2 महीने पहले 19 जनवरी को उनके पति आनंद प्रकाश (40) की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। 2 बेटियां और 1 बेटा है। अब तो दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो जाएगा। खेतों में कुछ नहीं बचा है।
महिल किसान बोली- मेरे ऊपर 20 लाख का कर्ज
कैलाश बताती हैं- गेहूं की फसल ओलावृष्टि से पूरी तरह खत्म हो गई। छोटे-छोटे बच्चे हैं, मैं कहां जाऊं? मेरे सिर पर 20 लाख का कर्ज है। सरकार से विनती है- जल्द मुआवजा दे, वरना परिवार कैसे चलाएंगे।
सुसाइड के अलावा कोई रास्ता नहीं
मोकलसर-रोही (सूरतगढ़) के सुनील (35) ने कहा- मेरे पास 10 बीघा जमीन है। कर्ज लेकर गेहूं की फसल बोई थी। अब न खाने को गेहूं बचा है, न पशुओं का चारा। फर्टिलाइजर के पैसे भी नहीं हैं, व्यापारी फोन कर रहे हैं। सुसाइड करने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा है
फसल जमीन पर बिछी, अब कहां जाऊं
मोकलसर के 85.300 RDR चक के ही मोलाराम ने बताया- 10 बीघा में गेहूं लगाया था, सब बर्बाद हो गया। आंखों के सामने अपनी फसल को चौपट होते हुए देखा था। तूफान आया, ओले गिरे और फसल जमीन पर बिछ गई। अब हम कहां जाएंगे? मरने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। अब सरकार से आस है कि मुआवजा दे।
बिना रुपए खेती कैसे करेंगे
मोकलसर-रोही के गिरधारी सिंह भाटी ने कहा- आसपास के किसानों से बात हुई। यहां 100 प्रतिशत फसल बर्बाद हुई है। गेहूं, सरसों, चना, मेथी… कुछ नहीं बचा। खाने को अनाज नहीं, पशुओं को तूड़ी नहीं। अब बिना पैसे के अगली खेती कैसे करेंगे। सरकार ही हमारी आखिरी उम्मीद है।
मोकलसर क्षेत्र में करीब 49 हजार बीघा में खड़ी फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। गेहूं के अलावा सरसों, चना, मेथी और अन्य फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ज्यादातर जगहों पर 100 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है।

4 अप्रैल तक किसानों के खेतों में ओले दिखे थे। किसानों को अब सरकार से मदद की आस है।
पटवारी बोले- नुकसान 100 प्रतिशत
गांव सरदारपुरा खर्था, ठेठार, कालूसर, देईदासपुरा, मोकलसर, हिंदोर, बछरारा, राजियासर स्टेशन, ऐटा, सोमासर, ठुकराना, बीरमाना, मालेर, राईयांवाली, भोजेवाला जैसे 15 से ज्यादा गांवों में ओलावृष्टि के बाद एक जैसा मंजर है।
मोकलसर रोही में फसल खराबे का जायजा लेने पहुंचे राजस्व पटवारी अमित पुरी ने बताया- क्षेत्र के 9 चकों में 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है। कृषि और राजस्व अधिकारियों के साथ सर्वे किया जा रहा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कलेक्टर को भेजी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेंगे, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा मिल सके।
