
हनुमानगढ़। नवज्योति विकलांग कल्याण एवं पुनर्वास संस्थान के तत्वावधान में आरपीडब्लयुडी अधिनियम 2016 पर आधारित एक दिवसीय ऑनलाइन जोनल सीआरई प्रोग्राम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना रहा।
संस्थान के सचिव भीष्म कौशिक एवं महाविद्यालय निर्देशिका डॉ. पायल ने बताया कि जागरूकता ही दिव्यांग सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में दिव्यांगजनों के अधिकारों और आवश्यकताओं के प्रति समझ विकसित नहीं होगी, तब तक उनके समग्र विकास की कल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विशेषज्ञों और शिक्षकों को नवीन जानकारियों से अपडेट रखते हैं।
कार्यक्रम का संचालन सतत् पुनर्वास कार्यक्रम के समन्वयक मनीष कुमार पाण्डेय के कुशल नेतृत्व में किया गया। उनके निर्देशन में कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुआ और प्रतिभागियों को विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए आरपीडब्लयुडी अधिनियम 2016 के प्रावधानों, दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला को समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक उत्कृष्ट और प्रेरणादायक पहल बताया।
इस अवसर पर डॉ. विजय भारती, प्रभात रंजन एवं रिंकू कुमार ने दिव्यांगता के क्षेत्र में अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने चाहिए।
कार्यक्रम में विशेष शिक्षकों एवं स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। सहयोग करने वालों में विपिन कुमार, ममता, नारायण दास पटेल, भारत शर्मा, विभा शर्मा, पूजा देवी और पंकज विश्नोई सहित संस्थान के अन्य सदस्य शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने न केवल दिव्यांग अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समाज को एक सकारात्मक दिशा में सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
