
हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ व्यापार मंडल, व्यापार संघ, फूडग्रेन व्यापार मंडल एवं खाद्य व्यापार संघ की संयुक्त बैठक जंक्शन व्यापार संघ धर्मशाला में आयोजित हुई। बैठक में सरकार की कथित दोहरी नीति तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद में आ रही तकनीकी खामियों के विरोध में व्यापारियों ने कड़ा रुख अपनाया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 15 अप्रैल तक मंडियों के समस्त कार्यों का बहिष्कार करते हुए सांकेतिक चक्का जाम किया जाएगा।
बैठक को संबोधित करते हुए व्यापार संघ के अध्यक्ष पदमचंद जैन, व्यापार मंडल अध्यक्ष धर्मचंद बंसल (डिंपल), खाद्य व्यापार संघ अध्यक्ष सुमित रणवा तथा फूड ग्रेन व्यापार मंडल अध्यक्ष महावीर सहारण ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरल और पारदर्शी तरीके से एमएसपी पर गेहूं की खरीद शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा स्लॉट सिस्टम को हटाने का दावा किया जा रहा है, जबकि वास्तव में इसे और अधिक जटिल बना दिया गया है, जिससे किसानों और आढ़तियों दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों ने कहा कि नियमों के अनुसार पहले पंजीकरण कराने वाले किसानों को प्राथमिकता के आधार पर गेहूं बेचने की तारीख दी जानी चाहिए, लेकिन व्यवहार में यह व्यवस्था पूरी तरह से विफल साबित हो रही है। तकनीकी खामियों के चलते किसान अपने गेहूं की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं और मंडियों में खरीद प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से किसी भी प्रकार की प्रभावी खरीद नहीं हो पाई है, जिससे किसानों में भारी रोष है।
बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि बायोमेट्रिक प्रणाली और ऑनलाइन पोर्टल की त्रुटियों के कारण किसानों का पूरा उत्पादन दर्ज नहीं हो रहा है। कृषि विभाग द्वारा जहां प्रति हेक्टेयर 62 क्विंटल उत्पादन मानक तय किया गया है, वहीं पोर्टल पर मात्र 10 से 13 क्विंटल तक ही उत्पादन दिखाया जा रहा है। इस विसंगति के कारण किसानों का आधा या उससे भी कम गेहूं ही समर्थन मूल्य पर बिक पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 15 अप्रैल तक टाउन और जंक्शन दोनों मंडियों में सांकेतिक चक्का जाम रहेगा। इसके बाद भी यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जा सकता है।
बैठक में उपस्थित व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि हनुमानगढ़ प्रदेश का प्रमुख गेहूं उत्पादक जिला है, इसके बावजूद यहां के किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर सरल एवं सुचारू खरीद व्यवस्था लागू की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और मंडियों में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
