
हनुमानगढ़। धाणका/धानका समाज के जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर चल रहा आंदोलन अब और अधिक तीव्र हो गया है। लंबे समय से जारी इस संघर्ष के तहत आज 15 अप्रैल से जिला हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर की समस्त तहसीलों की सभी अनाज मंडियों में पूर्ण हड़ताल रखी गई, जिसके चलते किसी भी प्रकार का कार्य नहीं हुआ। मंडियों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और इसका सीधा असर गेहूं की सरकारी खरीद पर पड़ा है। जंक्शन धानमंडी में भारी संख्या में मजदूरों ने कृषि उपज मंडी समिति के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। धानका मजदूर युनियन के अध्यक्ष दर्शन जांड़, सतपाल दामड़ी, पूर्व अध्यक्ष रणसिंह धानका, शेर सिंह शाक्य सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया और एक सुर में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की बात की।
गौरतलब है कि यह धरना 11 अगस्त 2025 से लगातार जारी है और आज यह 248वें दिन में प्रवेश कर चुका है। समाज के लोगों का आरोप है कि 2019 में जारी आदेश के कारण धाणका समाज के लोगों के अनुसूचित जनजाति (एसटी) के जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं, जिससे उनके बच्चों को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी के विरोध में समाज ने अब आंदोलन को और तेज करते हुए मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का निर्णय लिया है।
आज की हड़ताल का असर मंडियों में साफ तौर पर देखने को मिला। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर की मंडियां, जो इस समय गेहूं की आवक से पूरी तरह भरी पड़ी हैं, वहां सन्नाटा पसरा रहा। किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंचे जरूर, लेकिन हड़ताल के चलते न तो तुलाई हो पाई और न ही सरकारी खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस बार गेहूं की खरीद प्रक्रिया पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रही है। शुरुआत में स्लॉट सिस्टम और तकनीकी खामियों के विरोध में व्यापारियों ने हड़ताल की थी, जिसके चलते खरीद प्रभावित रही। बीच में 14 अप्रैल को केवल एक दिन ही सरकारी खरीद हो सकी, लेकिन अब 15 अप्रैल से धाणका तोला मजदूर यूनियन की हड़ताल शुरू हो जाने से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
मंडियों में इस समय “पीला सोना” कहे जाने वाले गेहूं की भरपूर आवक हो रही है। पिछले वर्ष हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में रिकॉर्ड तोड़ सरकारी खरीद हुई थी और इस बार भी बंपर फसल की उम्मीद है। लेकिन लगातार हड़तालों के कारण खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है कि समय पर खरीद सुनिश्चित की जाए।
धाणका समाज द्वारा जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक 2019 में जारी आदेश को वापस लेकर समाज के लोगों के जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। समाज का कहना है कि हजारों परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं और उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि धाणका समाज के लोग मुख्य रूप से मंडियों में मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं, लेकिन जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समाज ने इसे भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से तुरंत समाधान की मांग की है।
युनियन अध्यक्ष दर्शन जांड़ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो मंडियों की यह हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी। इस आंदोलन को व्यापारियों, किसानों और मजदूर संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक व्यापक होता जा रहा है।
ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है, एक ओर किसानों की फसल की समय पर खरीद सुनिश्चित करना और दूसरी ओर समाज की मांगों का समाधान निकालना। यदि स्थिति जल्द नहीं संभाली गई, तो इसका व्यापक असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
