
हनुमानगढ़। बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) के अधिकारियों और कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। सतीपुरा स्थित कार्यालय में कर्मचारियों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज करवाया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी रोष मार्च निकालते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
धरना स्थल पर कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी कीमत पर बिजली विभाग के निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका आरोप है कि निजीकरण की नीति से न केवल कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि आम जनता को भी महंगी बिजली और खराब सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। कर्मचारियों ने इसे जनविरोधी निर्णय बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण से स्थायी कर्मचारियों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलने से श्रमिकों का शोषण और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी निगम में कार्मिकों की कमी, तकनीकी संसाधनों का अभाव और कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन इनका समाधान करने के बजाय सरकार निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।
कर्मचारियों ने बताया कि लंबे समय से वेतन एवं भत्तों में विसंगतियां, पदोन्नति और स्थानांतरण में पारदर्शिता की कमी, तथा RDS के कार्यों में समन्वय के अभाव जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। इन मुद्दों को कई बार प्रशासन के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।
धरने के बाद कर्मचारियों ने सतीपुरा से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल रोष मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की और आमजन को भी इस नीति के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास किया। मार्च के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।
जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। इसके अलावा ज्ञापन में रिक्त पदों पर भर्ती, सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था, वेतन विसंगतियों को दूर करने और कार्यप्रणाली में सुधार की मांग भी शामिल रही।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। इसमें कार्य बहिष्कार, प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और अन्य बड़े कदम शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि आम जनता के हितों की रक्षा के लिए भी है।
धरना और रोष मार्च के दौरान कर्मचारियों में जबरदस्त एकजुटता देखने को मिली। सभी ने एक स्वर में निजीकरण का विरोध करते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
