
हनुमानगढ़ । टाउन में आज सेंट्रल पार्क के सामने उस समय अचानक यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जब टाउन की धान मंडी से गेहूं से भरे ट्रोले एफसीआई की कनक लेकर नई धान मंडी से रवाना हुए। देखते ही देखते मात्र 15 मिनट के भीतर दोनों तरफ करीब एक किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। आम राहगीरों, दोपहिया चालकों और स्कूली वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं परिवहन का जो रूट निर्धारित किया गया है, उसमें ट्रोलों को टाउन की नई धान मंडी से चुंगी नंबर 6 होते हुए फ्लाईओवर पार कर कोहला नहर के साथ-साथ एफसीआई गोदाम तक ले जाया जाना है। लेकिन इस रूट में सेंट्रल पार्क के पास यू-टर्न लेने की व्यवस्था ने पूरी यातायात व्यवस्था को बिगाड़ दिया। जैसे ही भारी भरकम ट्रोले यू-टर्न लेते हैं, सड़क संकरी होने के कारण वाहनों की आवाजाही रुक जाती है और देखते ही देखते जाम लग जाता है। आज लगे भारी जाम के कारण यातायात पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिसकर्मियों ने हाथों से ट्रैफिक संभालने की कोशिश की, लेकिन ट्रोलों की संख्या अधिक होने से स्थिति काबू में आने में लंबा समय लगा। कई वाहन चालक आधे घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहे। इस पूरे मामले पर ठेकेदार गगन सोढ़ा ने निगम द्वारा हमे इसी रुट से जाने के आदेश दिए गये थे, लेकिन यह रुट किसी भी प्रकार से उचित नही था,ठेकेदार द्वारा निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि गेहूं उठाव शुरू होने से पहले ही भारतीय खाद्य निगम को इस रूट को लेकर आगाह किया गया था। ठेकेदार का कहना है कि यह रूट शुरू से ही अव्यवहारिक है और इससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन निगम ने उनकी एक भी नहीं सुनी। गगन सोढ़ा ने यह भी बताया कि गेहूं का सीजन लगभग तीन महीने तक चलेगा। यदि यही रूट बना रहा तो रोजाना सेंट्रल पार्क के आसपास इसी तरह जाम लगेगा। इससे न केवल आमजन को परेशानी होगी, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहेगी। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि जिला प्रशासन को जल्द से जल्द इस रूट पर पुनर्विचार करना चाहिए। वैकल्पिक मार्ग तय कर ट्रोलों को शहर के व्यस्त इलाकों से बाहर निकाला जाए, ताकि ट्रैफिक सुचारू रूप से चल सके। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो जाम और हादसे दोनों ही आम बात हो जाएंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या आमजन की सुविधा के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर आने वाले तीन महीनों तक शहरवासियों को इसी अव्यवस्था से जूझना पड़ेगा।
