
हनुमानगढ़। पूर्व सांसद और 4 बार विधायक रहे श्योपत सिंह की 20वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। जंक्शन स्थित लाल चौक पर माकपा-सीटू के बैनर तले आयोजित इस सभा में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया।
सभा को संबोधित करते हुए रामेश्वर वर्मा ने श्योपत सिंह को संघर्ष और जन आंदोलन की जीवित मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि जागीरदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने जीवनभर खेत मजदूरों, दलितों और शोषित वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।
सरकार के खिलाफ किया था बड़ा आंदोलन वर्मा ने बताया कि भूमिहीन किसानों को जमीन दिलाने के लिए श्योपत सिंह ने सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। इस आंदोलन में हजारों लोगों को जेल जाना पड़ा था और कई आंदोलनकारी शहीद भी हुए थे।
जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया था सभा में वक्ताओं ने बताया कि श्योपत सिंह ने पानी, विस्थापन और बस्तियों को उजाड़ने जैसे मुद्दों पर हमेशा पीड़ितों को साथ दिया। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े रहे और सैद्धांतिक रूप से सरकारों की नीतियों का विरोध करते थे। उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया और कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
न्याय के लिए संगठित संघर्ष जारी रखने का आह्वान करीब 50 सालों के अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उन्होंने आमजन के बीच गहरी छाप छोड़ी। 26 मार्च 2006 को उनके निधन के साथ प्रदेश ने एक मजबूत जननेता खो दिया, लेकिन उनके विचार आज भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
वक्ताओं ने आह्वान किया कि श्योापत सिंह के विचारों को आत्मसात कर समाज के हर व्यक्ति तक न्याय सुनिश्चित करने के लिए संगठित संघर्ष जारी रखा जाए। इस अवसर पर रघुवीर वर्मा, शेर सिंह शाक्य, बलदेव सिंह, सुभाष मक्कासर, बहादुर चौहान, बीएस पेंटर, आत्मा सिंह, बसंत सिंह समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
