
हनुमानगढ़। जिले सहित श्रीगंगानगर क्षेत्र में धाणका/धानका समाज द्वारा लंबे समय से चली आ रही जाति प्रमाण पत्र संबंधी समस्या को लेकर अब जन-आक्रोश तेज होता नजर आ रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के 9 अगस्त 2019 के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार के वर्ष 1976 के गजट नोटिफिकेशन में राजस्थान की अनुसूचित जनजाति सूची में ‘धाणका’ जाति को शामिल किया गया है। हालांकि, स्थानीय बोलचाल में ‘ण’ और ‘न’ के उच्चारण में समानता के कारण वर्षों तक सरकारी दस्तावेजों में ‘धानका’ लिखा जाता रहा। इसी आधार पर प्रशासन द्वारा पूर्व में जांच के बाद समाज के लोगों को ‘धानका’ नाम से अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।
समाज के लोगों का आरोप है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 9 अगस्त 2019 को जारी आदेश के बाद से केवल वर्तनी (स्पेलिंग) के अंतर को आधार बनाकर पुराने प्रमाण पत्रों को अमान्य माना जा रहा है। इससे समाज के अनेक युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन में इसे एक तकनीकी त्रुटि बताते हुए सुधार की मांग की गई है।
समाज का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर 11 अगस्त 2025 से शांतिपूर्ण धरना भी जारी है, जो अब लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे समाज में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में 2019 के आदेश को निरस्त कर पूर्व में जारी ऑफलाइन ‘धानका’ प्रमाण पत्रों को वैध मानते हुए उनके आधार पर डिजिटल ‘धाणका’ (ST) प्रमाण पत्र जारी करने, पिता के प्रमाण पत्र को प्रथम दृष्टया साक्ष्य मानकर नई पीढ़ी के प्रमाण पत्र बनाने, तथा प्रमाण पत्र प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग शामिल है। इसके अलावा केंद्र सरकार के प्रारूप में प्रमाण पत्र जारी करते समय राज्य स्तर के प्रमाण पत्र को ही आधार मानने की भी मांग रखी गई है।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो 15 अप्रैल 2026 से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले की सभी अनाज मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जाएगा। इसके साथ ही जिला कलेक्टर कार्यालयों और उपखंड कार्यालयों के सामने चक्का जाम और विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
समाज ने विभिन्न किसान संगठनों, व्यापार मंडलों और श्रमिक संगठनों से समर्थन की अपील भी की है। ज्ञापन में कहा गया है कि समाज शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस मौके पर धान मंडी जिलाध्यक्ष रमेश धाणका, संघर्ष समिति के संयोजक जितेंद्र धाणका, पवन धाणका, धर्मेंद्र धाणका,ज्वाला धाणका, रमेश धाणका, कृष्ण धाणका, गौरव धाणका
