
हनुमानगढ़। गेहूं खरीद में लागू किए गए बायोमेट्रिक और स्लॉट सिस्टम के विरोध में 9 अप्रैल को प्रस्तावित कलेक्ट्रेट घेराव कार्यक्रम को किसान सभा और सीटू ने फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह निर्णय अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया।
पूर्व घोषित आंदोलन को देखते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर, हनुमानगढ़ ने किसान एवं मजदूर संगठनों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में कामरेड रामेश्वर वर्मा, आत्मा सिंह, शेर सिंह शाक्य, सुल्तान खान, गुरप्रेम सिंह और शिवकुमार सहित अन्य नेताओं ने भाग लिया। वार्ता में किसानों ने सरकार की नई खरीद नीति और गाइडलाइन का कड़ा विरोध जताया।
किसान नेताओं का कहना था कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही यह नीति सभी राज्यों पर समान रूप से लागू की जा रही है, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में एक समान नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उन्होंने बायोमेट्रिक और स्लॉट सिस्टम को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार किसानों और व्यापारियों को संदेह की नजर से देख रही है।
वार्ता के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने किसानों को आश्वस्त किया कि इस सीजन में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खरीद नीति में कई महत्वपूर्ण शिथिलताएं दी गई हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सह खातेदारों की सहमति ओटीपी के माध्यम से ली जा सकेगी, जबकि बटाईदार किसानों के लिए भी सरल प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
इसके अलावा, पंजीकरण प्रक्रिया में लचीलापन देते हुए किसानों को 6 अप्रैल से 31 मई तक किसी भी सप्ताह में अपनी उपज बेचने का विकल्प दिया गया है। बिना पंजीकरण वाले किसानों को भी सीमित संख्या में टोकन जारी करने की व्यवस्था की गई है। गिरदावरी के आधार पर अधिकतम खरीद सीमा में 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त छूट भी प्रदान की गई है।
एफसीआई के माध्यम से बारदाना आपूर्ति सुनिश्चित करने और गोदामों में माल उतारने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही खरीद संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने की बात कही गई है।
किसान एवं मजदूर नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल 9 अप्रैल का कार्यक्रम स्थगित किया है, आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है। यदि नई खरीद नीति से किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है, तो वे दोबारा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
