
हनुमानगढ़। जिले में गेहूं की सरकारी खरीद व्यवस्था में आ रही गंभीर समस्याओं को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सीटू के जिला महासचिव शेर सिंह शाक्य और सुल्तान खान के नेतृत्व में किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर त्वरित समाधान की मांग की। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक खामियों के कारण सैकड़ों काश्तकार अपनी उपज बेचने से वंचित हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि कई खातों को “अपवादित” या विवादित श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके चलते उन खातों से जुड़े सभी काश्तकारों की गेहूं खरीद रोक दी गई है, जबकि वास्तविकता में सभी काश्तकार विवाद से संबंधित नहीं हैं। इस कारण हजारों क्विंटल गेहूं खरीद प्रक्रिया से बाहर हो रहा है और किसानों को मजबूरन अपनी फसल कम दामों में निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।
सीटू जिला महासचिव शेर सिंह शाक्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा विवादित खातों का उचित सत्यापन किए बिना ही पूरी जमाबंदी को रोक देना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि जिन खातों में वास्तविक विवाद है, केवल उन्हीं हिस्सों को अलग रखते हुए बाकी काश्तकारों की खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। इससे बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिल सकेगी।
इसके अलावा, गिरदावरी में हुई गड़बड़ियों को भी प्रमुख समस्या बताया गया। कई क्षेत्रों में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किया गया है। ऐसे किसानों का नाम सरकारी खरीद सूची में नहीं आ रहा, जिससे वे अपनी उपज बेचने से वंचित हैं। किसानों ने कहा कि यह लापरवाही सीधे उनकी आजीविका पर असर डाल रही है और तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
सीटू नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि गिरदावरी की पुनः जांच कर वास्तविक स्थिति के अनुसार संशोधन किया जाए तथा प्रभावित किसानों को तुरंत खरीद प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
