
हनुमानगढ़। ग्राम सेवा सहकारी समितियों (PACS) के कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान को लेकर सोमवार को राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले में व्यापक प्रदर्शन किया गया। “ढोल बजाओ, सरकार जगाओ अभियान” के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जाट धर्मशाला, कोर्ट रोड, हनुमानगढ़ जंक्शन में एकत्रित होकर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन में भाग लिया। ढोल बजाते ओर सरकार के विरोध में नारे लगाते कर्मचारी कलेक्ट्रेट तक पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सोपा।
सम्मेलन में विशेष रूप से प्रदेश अध्यक्ष हनुमान सिंह राजावत, प्रदेश अध्यक्ष मदन मेनारिया, प्रदेश महामंत्री देवेंद्र सदावत, कोषाध्यक्ष बलदेव गेट, चूरू से पवन पूनिया, उदयपुर से वाल सिंह, बीकानेर से राकेश सहारण, गंगानगर से प्रगट सिंह, जसवंत प्रचार, ओमप्रकाश रोझ, खैरथल तिजारा से सुभाष योगी, श्रीगंगानगर से वीरेंद्र यादव ने संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता हनुमानगढ़ जिलाध्यक्ष रमेश ढाका ने की।
सम्मेलन में जिलेभर से आए पैक्स कर्मचारियों ने विभागीय उदासीनता पर नाराजगी जताई और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। रैली के दौरान कर्मचारियों ने ढोल बजाकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और शीघ्र मांगों के समाधान की मांग की।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि समिति द्वारा पूर्व में 6 अगस्त 2025 को मांग पत्र प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि विभागीय स्तर पर सितंबर और अक्टूबर 2025 में हुई वार्ताओं में सकारात्मक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब तक कैडर अथॉरिटी के गठन सहित अन्य मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि प्रशासनिक शिथिलता और वादाखिलाफी के कारण 27 फरवरी 2026 से पैक्स से जुड़े सभी कार्यों का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जा रहा है। इसमें कम्प्यूटराइजेशन, फसली ऋण वितरण एवं वसूली, तथा गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों के साथ-साथ किसानों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में जाट धर्मशाला में पुनः बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। सभी कर्मचारियों ने एकजुट रहकर संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया। इसके पश्चात सामूहिक प्रतिभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रदर्शन के दौरान बैंक के सभी 16 रन पर्यवेक्षकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा बैंक प्रबंध निदेशक को सोपा। सम्मेलन में तय हुआ की 1 अप्रैल से सभी सहकारी समितियां अपनी जमा राशि की निकासी करेंगे।
